Saturday, January 16, 2021
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देश को दी थी सर्जिकल स्ट्राइक की जानकारी, अब मिली ये अहम जिम्मेदारी

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नई दिल्ली। पूरे देश को सितंबर 2016 में सर्जिकल स्ट्राइक की जानकारी देने वाले लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह को उत्तरी कमान का आर्मी कमांडर बनाया गया है। वो लेफ्टिनेंट जनरल देवराज अनबू की जगह लेंगे, जिन्हें उप थल सेना प्रमुख बनाया गया है।

58 साल के लफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में मौजूद उत्तरी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ( जीओसी) होंगे। लेफ्टिनेंट जनरल सिंह उस वक्त डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशन्स( DGMO) थे, जब भारतीय सेना के कमांडोज ने 2015 में म्यांमार में घुसकर आतंक के अड्डों को तबाह कर दिया था।

इसके अलावा भारतीय सेना ने 29 सितंबर, 2016 को भी ऐसा कारनामा किया था, जिससे पूरी दुनिया हैरान रह गई थी। दरअसल उड़ी में भारतीय सेना के ब्रिगेड मुख्यालय पर हुए हमले में जवानों की शहादत का बदला लेने के लिए भारतीय सेना की स्पेशल पैरा फोर्सेस के कमांडोज ने लाइन ऑफ कंट्रोल के पार जाकर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर ( पीओके) में चल रहे आतंकियों के लॉन्च पैड को बर्बाद कर दिया था। भारतीय सेना की इस सर्जिकल स्ट्राइक की जानकारी भी लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह ने ही देश को दी थी।

ऐसा रहा लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह का सफर

मिलिट्री ऑपरेशन्स डायरेक्टोरेट में कर्नल और ब्रिगेडियर रह चुके लेफ्टिनेंट जनरल सिंह ने भारतीय सेना के ऑपरेशन्स के दौरान समन्वयक की अहम जिम्मेदारी निभाई है। ऐसे में मौजूदा आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत के 2019 में रिटायर होने के बाद वो उनका सेना प्रमुख बनने का दावा सबसे मजबूत है। हालांकि वो इकलौते अफसर नहीं है, जो इस दौड़ में शामिल हैं। उनके अलावा शिमला में मौजूद आर्मी ट्रेनिंग कमांड( आरट्रैक) की कमान संभाल रहे लेफ्टिनेंट जनरल मुकुंद नरवाने, जोकि लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह से सीनियर हैं। वो भी सेना प्रमुख बनने की दौड़ में शामिल हैं।

उत्तरी कमांड की कमान संभालने वाले लेफ्टिनेंट जनरल सिंह ने 1980 में डोगरा रेजीमेंट की 9वीं बटालियन में कमीशन लिया था। अपने करियर में लेफ्टिनेंट जनरल सिंह ने एक माउंटेन ब्रिगेड, एक आर्मर्ड डिवीजन और एक स्ट्राइक कोर की कमान भी संभाली है। इसके अलावा वो संयुक्त राष्ट्र की शांति सेना के लिए भी रवांडा और सूडान में काम कर चुके हैं। उन्होंने सुडान में बतौर चीफ ऑपरेशन्स ऑफिसर काम किया।

वहीं लेफ्टिनेंट जनरल देवराज अनबू, जिन्हें उप थल सेना प्रमुख बनाया गया है, वो भी भारतीय सेना के एक सम्मानित अधिकारी हैं। उन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल सरथ चंद की जगह ये जिम्मेदारी संभाली है।

ऐसा रहा लेफ्टिनेंट जनरल अनबू का सफर

लफ्टिनेंट जनरल अनबू नेशनल डिफेंस एकेडमी से पास आउट हुए हैं। उन्होंने 14 सिख लाइट इंफ्रेंट्री में सात जून, 1980 को कमीशन लिया। अपने करियर में लेफ्टिनेंट जनरल अनबू ने कई सैन्य अभियान की अगुवाई की। सियाचिन में तैनाती से लेकर घाटी में आतंकियों के सफाए से जुड़े ऑपरेशन सब में उन्होंने हिस्सा लिया। इसके अलावा श्रीलंका में भारतीय सेना के ‘ऑपरेशन पवन’ में भी वो मौजूद थे।

अपने 37 साल के सैन्य करियर में उन्होंने भारतीय सेना के ‘ऑपरेशन पराक्रम’ में भी हिस्सा लिया। इसके अलावा लाइन ऑफ कंट्रोल के पास उन्होंने एक इंफेंट्री बिग्रेड, सिक्किम में एक माउंटेन डिवीजन और भूटान में भारतीय सेना की ट्रेनिंग टीम की जिम्मेदारी निभाई।

नए उप थल सेना प्रमुख को ऑपरेशन मेघदूत के दौरान काम करने के लिए सेना मेडल के अलावा अति विशिष्ट सेवा मेडल, उत्तम युद्ध सेवा मेडल जैसे तमगे भी मिल चुके हैं। वहीं वो नेशनल डिफेंस एकेडमी में बतौर इंस्ट्रक्टर भी काम कर चुके हैं। वहीं नामीबिया में हुए संयुक्त राष्ट्र मिशन में भी वो अपनी काबिलियत साबित कर चुके हैं।

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