गौतमपुरा (इंदौर)। वर्षों पुरानी परंपरा को जीवित बनाए रखने के लिए हिंगोट युद्ध के लिए जांबाज योद्धा तैयार हैं। दीपावली के अगले दिन पड़वा (शुक्रवार) को यह जोखिम भरा हिंगोट युद्ध दो दल क्रमश: तुर्रा (गौतमपुरा) तथा कलंगी (रुणजी) के बीच होगा। दुस्साहसी योद्धा शाम होते ही एक-दूसरे पर हिंगोट बरसाना शुरू कर देंगे।

देवनारायण मंदिर के सामने मैदान पर धोक पड़वा पर सूर्यास्त होते ही युद्ध शुरू होगा। जांबाज योद्धा युद्ध के लिए तैयार हैं। हिंगोट युद्ध के दिन योद्धा अपने-अपने दल का निशान लेकर घर से निकल पड़ेंगे। जैसे ही सूरज अस्त होने को होगा, वह बिना किसी संकेत के एक-दूसरे पर बौछार शुरू कर देंगे और तब तक यह युद्ध जारी रहेगा जब तक कि अपने तरकश में रखे आखिरी हिंगोट खत्म न हो जाए। योद्धा युद्ध समाप्त होने के पश्चात एक-दूसरे के गले मिलकर मन का मलाल दूर करेंगे।

ऐसे बनता हैं हिंगोट

हिंगोट हिंगोरिया नामक पेड़ पर पैदा होता है जो नींबू के आकारनुमा होकर ऊपर से नारियल समान कठोर तथा अंदर से खोखला होता है, जिसे योद्धा जंगल पहुंचकर पेड़ से तोड़कर लाते हैं। इसके बाद ऊपर से सफाई करने के साथ एक छोर पर बारीक तथा दूसरे छोर पर बड़ा छेद करते हैं। फिर उसे दो-तीन दिन तक धूप में सुखाने के बाद खुद के द्वारा तैयार बारूद भरते हैं। इसके बाद बड़े छेद को पीली मिट्टी से बंद कर और बारीक छेद पर बारूद की बत्ती लगा देते हैं। जिस पर अग्नि को छुआते ही हिंगोट जल उठता है। यह कार्य एक माह पहले से शुरू हो जाता है।

हर वर्ष हिंगोट युद्ध के मैदान में उतरने वाले योद्धा बब्बू गोगवानी का कहना है कि वह अपनी परंपरा को कायम रखने के लिए इस बार भी दमखम के साथ मैदान में उतरेंगे। हिंगोट युद्ध के दिन मैदान पर नगर परिषद के मंच के साथ राजनीतिक मंच भी लगेंगे, जहां विधायक, पूर्व विधायक, जनप्रतिनिधि एवं अधिकारीगण मौजूद रहेंगे। मैदान पर दोनों ओर चिकित्सक विभाग की टीम घायलों के उपचार हेतु मौजूद रहेगी। विद्युत व्यवस्था, पेयजल की व्यवस्था नगर परिषद द्वारा की जाएगी।

शराब पीकर युद्ध मैदान में नहीं उतरेगा कोई योद्धा

नगर में 20 अक्टूबर को आयोजित हिंगोट युद्ध के संबंध में बुधवार को थाना परिसर में बैठक आयोजित की गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि कोई भी व्यक्ति शराब पीकर युद्ध मैदान में नहीं उतरेगा। हिंगोट नहीं बेचेगा। यदि यह पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यातायात व्यवस्था के संबंध में बताया गया कि प्रशासनिक अधिकारियों के वाहन युद्ध मैदान के समीप ईदगाह मैदान पर खड़े होंगे एवं युद्ध देखने आने वाले दर्शकों के वाहन शक्ति मंदिर नाका के समीप पुराने दशहरा मैदान पर खड़ किए जाएंगे।

सभी से हिंगोट युद्ध को शांतिपूर्ण मनाने में सहयोग देने का आग्रह किया गया। बैठक में एसडीओपी विक्रम सिंह राठौर, थाना प्रभारी अनिल वर्मा, देपालपुर थाना प्रभारी सुनील यादव, नायब तहसीलदार एनके मालवीय, नगर परिषद अध्यक्ष चेतन भावसार, विनोद गुर्जर, सुनील जोशी, पार्षद महेश प्रजापत, एल्डरमैन मोहन दास बैरागी, राजा पाटीदार, कलंगी और तुर्रा दल के योद्धा उपस्थित थे।

पुलिस ने अपनाया सख्त रवैया

गौरतलब है कि इस समय पुलिस प्रशासन हिंगोट बनाने वाले लोगों पर सख्त रवैया अपनाए हुए है। हिंगोट बनाते या फिर बनाने की खबर मिलते ही उन्हें पकड़ने की कार्रवाई की जा रही है। स्थिति यह है कि नगर में कोई भी व्यक्ति हिंगोट बनाते हुए नजर नहीं आ रहा है। लेकिन युद्ध में उतरने वाले योद्धा हिंगोट पहले ही तैयार कर चुके हैं।

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