अगरतला। त्रिपुरा विधानसभा चुनाव के लिए 18 फरवरी को हुए मतदान के बाद आज सुबह 8 बजे से मतगणना जारी है। अब तक आएनतीजों और रुझानों में भाजपा राज्य में बहुमत प्राप्त करती नजर आ रही है। अब तक आए 59 सीटों के रुझानों में भाजपा जहां 40 सीटों पर आगे चल रही है वहीं 25 सालों से सत्ता संभाल रही लेफ्ट 19 सीटों पर आगे चल रही है।

अगर यह रुझान नतीजों में बदलते हैं और भाजपा यहां सरकार बनाती है तो यह ऐतिहासिक होगा, क्योंकि 2013 के चुनावों में भाजपा यहां खाता भी नहीं खोल पाई थी। इस बार शुरुआती रूझानों में पार्टी 40 सीटों का आंकड़ा छू सकती है।

भाजपा को अब तक 48 फीसदी वोट मिले हैं, वहीं लेफ्ट के पक्ष में 45 फीसदी वोट गए हैं। पिछले चुनावों में लेफ्ट को 49 सीटें मिली थीं, जबकि भाजपा का खाता भी नहीं खुला था।

यहां 18 फरवरी को मतदान हुआ था। मतदान के बाद जारी एग्जिट पोल्स की माने तो राज्य में भाजपा मजबूती से उभरेगी और हो सकता है बहुमत भी पा ले। अगर ऐसा होता है तो देश में लेफ्ट की सरकार महज केरल में सिमटकर रह जाएगी।

वहीं दूसरी तरफ राज्य की पूर्व लेफ्ट सरकार के लिए अपना किला बचाने की चुनौती है। सीपीएम प्रत्याशी रामेंद्र नारायण के निधन के कारण चारीलाम विधानसभा सीट पर अब 12 मार्च को मतदान होगा। इस बार 23 महिलाओं सहित कुल 292 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं।

18 फरवरी को हुई वोटिंग में इस राज्य में 91 फीसद मतदान हुआ। वाममोर्चा के गढ़ त्रिपुरा में इस बार सत्तारूढ़ वाममोर्चा को भाजपा से कड़ी चुनौती मिल रही है। कांग्रेस ने भी सभी सीटों पर अपने उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारा है। चुनाव प्रचार में इस बार भाजपा ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।

इससे पहले दो एक्जिट पोल के नतीजे बताते हैं कि त्रिपुरा में भाजपा सरकार बनने के पूरे आसार हैं। त्रिपुरा में पिछले 25 साल से वाम दलों की सरकार है, लेकिन इस बार राज्य में भाजपा आइपीएफटी के सहयोग से सरकार बना सकती है।

वाम गठबंधन सरकार के मुखिया माणिक सरकार को उम्मीद है कि जनता उन्हें पांचवीं बार राज्य की बागडोर सौंपेगी। अगर 1988 से 1993 तक कांग्रेस नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार को छोड़ दें तो त्रिपुरा में 1978 से लेकर अब तक वाम मोर्चा की सरकार है। वर्तमान मुख्यमंत्री माणिक सरकार 1998 से सत्ता में हैं।

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