साल 2013 में 31 अगस्त का दिन.. जी हां यही वह दिन था जब इंदौर में तनाव के हालात थे.. लोगों का हुजूम उमड़ रहा था और पुलिस-प्रशासन के हाथ-पांव फूल रहे थे। यह नजारा था इंदौर के खंडवा रोड़ इलाके का था। दरअसल यहीं आसाराम बापू का आश्रम है। तनाव इसलिए था क्योंकि आसाराम पर जोधपुर में यौन शोषण के आरोप में मामला दर्ज किया गया था और उस पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही थी। उस समय आसाराम का इंदौर में ही सत्संग चल रहा था।

लगातार बढ़ रहा था तनाव

मौके पर आसाराम के समर्थकों की संख्या लगातार बढ़ रही थी और पुलिस व प्रशासन के आला अधिकारियों के सामने स्थिति को नियंत्रण में रखने की चुनौती थी। आश्रम को पूरी तरह से आसाराम के सेवादारों ने अपने कब्जे में ले लिया था और किसी को भीतर जाने की इजाजत नहीं थी। यहां तक की पुलिस अधिकारी तक अंदर नहीं जा पा रहे थे। केवल आसाराम के अनुयायी ही भीतर जा रहे थे। झोले में कुछ सामान लेकर हजारों की संख्या में इन आसाराम भक्तों के आने का सिलसिला तड़के से शुरू हो गया था। सबसे ज्यादा संख्या महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान से इंदौर पहुंचने वालों की थी।

अतिरिक्त फोर्स तैनात की गई

स्थिति देखते हुए दोपहर करीब 12 बजे तक आश्रम के आसपास अतिरिक्त फोर्स तैनात कर दी गई। आश्रम जहां अनुयायियों का कब्जा था, वहीं बाहर के क्षेत्र में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात था। तनाव इसलिए भी था क्योंकि एक दिन पहले ही जोधपुर में आसाराम के समर्थकों ने जमकर उत्पात मचाया था। मीडियाकर्मियों के साथ मारपीट की गई थी, ओबी वैन तोड़ दी गई थी।

इंदौर के तत्कालीन कलेक्टर आकाश त्रिपाठी और एसपी अनिल सिंह कुशवाह लगातार मौके पर मौजूद थे। ये अधिकारी लगातार आश्रम के पदाधिकारियों से सम्पर्क में थे क्योंकि जोधपुर पुलिस आसाराम की गिरफ्तारी के लिए इंदौर पहुंच गई थी।

पुलिस पहुंची तो शुरू कर दिया सत्संग

31 अगस्त को जब जोधपुर पुलिस आसाराम से पूछताछ के लिए इंदौर के आश्रम पहुंची तो आसाराम ने सत्संग शुरू कर दिया। जोधपुर पुलिस को बाहर ही रोक दिया। पुलिस सत्संग समाप्त होने का इंतजार कर रही थी कि आसाराम सत्संग समाप्त होने पर आराम करने चले गए। आसाराम के बेटे नारायण सांई ने पुलिस और मीडिया को बताया कि आसाराम की तबीयत थोड़ी खराब है इसलिए वो आराम कर रहे हैं। पुलिस भी वहीं डटी रही।

असमंजस की ये स्थिति पूरे दिन चली। शाम को कुछ खबरें ऐसी भी आईं कि आसाराम आश्रम के पिछले दरवाजे से फरार हो गया है और उसे एक गाड़ी में रतलाम टोल नाके से गुजरते देखा गया। लेकिन जिस तरह से पुलिस और प्रशासन ने पूरे आश्रम को घेर रखा था, उससे ये तय था कि आसाराम आश्रम के अंदर ही है। इस दौरान कुछ स्थानीय नेता भी आसाराम से मिलने पहुंचे।

पुलिसकर्मियों ने आश्रम में किया प्रवेश

रात करीब 10 बजे अचानक हलचल बढ़ी। आसाराम को लेकर स्थिति स्पष्ट करने के लिए पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने आश्रम में प्रवेश किया। ये अधिकारी कई बार अंदर-बाहर हुए। आश्रम के भीतर क्या बात हुई ये अधिकारियों ने मीडिया से साझा नहीं की। देर रात करीब 11 बजे अधिकारियों के साथ सुरक्षाकर्मियों की एक टुकड़ी ने आश्रम में प्रवेश किया। जाहिर था कि अगले कुछ पलोंं में मामले का पटाक्षेप होने वाला था। लेकिन इस बार भी करीब डेढ़ घंटे का इंतजार रहा।

काली गाड़ी में ले गए आसाराम को

ठीक साढ़े 12 बजे आश्रम के गेट खुले। पुलिस की गाड़ियों के बीच काले रंग की एक बड़ी गाड़ी तेजी से बाहर निकली और सीधे एयरपोर्ट के लिए रवाना हुई। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था।

पूरा घटनाक्रम इतनी तेजी से हुआ कि अनुयायियों को भनक नहीं पड़ी। आसाराम को ले जाते ही पुलिस ने आश्रम को घेर लिया और एक भी समर्थक को बाहर नहीं निकलने दिया। ये समर्थक आश्रम के भीतर से पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करते रहे।

सुबह तक एयरपोर्ट के अंंदर ही रखा

देर रात इंदौर पश्चिम एसपी (तत्कालीन ) अनिल सिंह कुशवाहा ने आसाराम को गिरफ्तार किए जाने की पुष्टि की। बताया कि आसाराम को जोधपुर ले गया है। हालांकि सच्चाई ये थी कि आसाराम को इंदौर एयरपोर्ट के भीतर ले जाकर वहीं रखा गया था क्योंकि उन्हें ले जाने वाली फ्लाइट सुबह जानी थी। एअर इंडिया की फ्लाइट से आसाराम को पहले दिल्ली और फिर जोधपुर ले जाया गया।

बताया गया कि आसाराम को गिरफ्तार करने जब पुलिस पहुंची तो उन्होंने पुलिस को सहयोग करने से साफ इन्कार कर दिया। यहां तक कि पुलिस अधिकारियों को धमकाया भी। बाद में उन्हें पकड़ लिया गया।

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