Saturday, January 16, 2021
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आज शिवसेना प्रमुख के अलावा लता, माधुरी और रतन टाटा से मिलेंगे अमित शाह

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नई दिल्ली। भाजपा द्वारा 2019 के चुनाव को देखते हुए शुरू किए गए करेंगे। समर्थन के लिए संपर्क अभियान के तहत भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह आज शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे से मुलाकात करेंगे। उनके अलावा शाह, लता मंगेशकर, रतन टाटा और माधुरी दीक्षित से भी मुलाकात कर समर्थन मांगेंगे।

आने वाले लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी एकता के बुलंद हो रहे नारों के बीच भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने राजग में आ रही दरार को दूर करने के लिए कदम बढ़ाया है। समर्थन के लिए संपर्क के दौरान उद्धव ठाकरे से उनकी मुलाकात के कई मायने होंगे। वहीं शाह गुरुवार को पंजाब के पुराने सहयोगी अकाली दल नेतृत्व के साथ मुलाकात संभावित है। बहुत जल्द वे जदयू अध्यक्ष व बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी मुलाकात करेंगे।

मुंबई में रतन टाटा, लताजी व माधुरी से मांगेंगे समर्थन

सहयोगी दलों के नेताओं के साथ शाह की यह मुलाकात “संपर्क फॉर समर्थन अभियान” के बीच ही होगी। मुंबई में वह रतन टाटा, लता मंगेशकर और माधुरी दीक्षित से मिलेंगे। टाटा के जरिये उद्योग जगत को साधने की कोशिश होगी। वहीं लता मंगेशकर और माधुरी दीक्षित के जरिए उनके करोड़ों प्रशंसक को। याद रहे, अटल सरकार के वक्त ही लताजी को राज्यसभा में मनोनीत किया गया था। शाह चंडीगढ़ में संभवतः मिल्खा सिंह से मिलकर उनसे भाजपा के लिए समर्थन मांगेंगे।

जदयू नेताओं के बयान से बखेड़ा

एक दिन पहले ही बिहार में कुछ जदयू नेताओं के बयान ने विवाद खड़ा कर दिया और विपक्ष को मौका दिया। वहीं शिवसेना का रुख कई बार असहज करता रहा है। शिवसेना की ओर से न सिर्फ केंद्र सरकार बल्कि प्रधानमंत्री को भी निशाना बनाया जाता रहा है। हालांकि महाराष्ट्र सरकार में भाजपा- शिवसेना साथ-साथ हैं, लेकिन उनकी ओर से इसकी घोषणा की जा चुकी है कि अगला लोकसभा चुनाव वह अलग लड़ेगी। हाल में पालघर संसदीय सीट पर मुख्य मुकाबला भी भाजपा और शिवसेना के ही बीच हुआ था। ऐसे में शाह का उद्धव के घर जाना अहम माना जा रहा है।

पासवान से हो चुकी बात

ध्यान रहे कि लोजपा अध्यक्ष राम विलास पासवान और अमित शाह की मुलाकात रविवार को हो चुकी है। सात जून को बिहार में भाजपा नेतृत्व की ओर से सहयोगी दलों को खाने पर बुलाया गया है, जिसे संवाद का ही एक रूप माना जा रहा है। लेकिन खुद अमित शाह छोटे-बड़े सभी सहयोगी दलों से मिलेंगे।

इसी क्रम में अगले एक सप्ताह के अंदर ही नीतीश कुमार से मुलाकात की संभावना है। रालोसपा अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा से उससे पहले ही मुलाकात हो सकती है। सूत्रों की मानें तो आने वाले एक-दो महीनों में उन छोटे-छोटे क्षेत्रीय दलों के साथ भी भाजपा नेताओं का संपर्क और संवाद बढ़ेगा, जिनका संसद में कोई प्रतिनिधित्व नहीं है।

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