नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच टू प्लस टू वार्ता दिल्ली में खत्म हो चुकी है। इस बैठक में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के अलावा रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण भी मौजूद थीं। अमेरिकी विदेश सचिव के साथ हुई इस बैठक में दोनों देशों के बीच कई समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। इनमें कॉमकासा समझौते पर भी हस्ताक्षर हुए।

बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि हमने भारत के एनएसजी का सदस्य बनने की दिशा में मिलकर आगे बढ़ने का फैसला किया है। हम अफगानिस्तान पर राष्ट्रपति ट्रंप की पॉलिसी का स्वागत करते हैं। हम आतंकवाद से लड़ने के लिए साथ मिलकर काम कर रहे हैं।

वहीं रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि बैठक में हमने शांति, स्थिरता और विकास के लिए हर संभव सहयोग पर सहमति जताई है। साथ ही आतंक के खिलाफ सहयोग जारी रखने पर भी जोर दिया। कम्यूनिकेशन कम्पेटिबिलिटी एंड सिक्युरिटी एग्रीमेट (कॉमकासा) पर हस्ताक्षर के साथ ही भारत अब अमेरिका की एडवांस तकनीकों का लाभ ले सकेगा।

बैठक शुरू होने के बाद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि मुझे विश्वास है कि आज हमारे द्वारा की गई चर्चा और फैसले लिए जाएंगे वो हमारी साझेदारी के स्तर को और ऊपर ले जाएंगे साथ ही दोनों देशों के संबंधों को और बेहतर करेंगे।

बैठक के दौरान रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि यह मुलाकात पिछले कुछ सालों में हमारे द्वारा रिश्तों को बेहतर करने की दिशा में किए गए प्रयासों को दिखाती है। यह हमारे लोगों, क्षेत्र और उससे परे के लाभ के लिए हमारी द्विपक्षीय भागीदारी की विशाल संभावना की एक मजबूत मान्यता है।

इससे पहले अमेरिका के विदेश सचिव माइक पोंपियो और सुषमा स्वराज मुलाकात की। इस बैठक के लिए पोंपियो बुधवार रात इस्लामाबाद से दिल्ली पहुंचे।

बता दें कि ट्रंप प्रशासन आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान पर लगातार दबाव बनाये हुए है। लेकिन कई बार उसकी तरफ से यह संकेत भी दिया जा चुका है कि वह भारत व पाकिस्तान के बीच रिश्तों को सुधारने का भी इच्छुक है। कूटनीतिक सूत्रों के मुताबिक अमेरिका व भारत के बीच इस बात को लेकर चिंता है कि पाकिस्तान पूरी तरह से चीन व रूस के बीच पनप रहे गठबंधन का एक अहम हिस्सा न बन जाये।

अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोंपियो और रक्षा मंत्री जिम मैटिस बुधवार को इस्लामाबाद होते हुए देर रात नई दिल्ली पहुंचे हैं। पाकिस्तान में पोंपियो की प्रधानमंत्री इमरान खान और विदेश मंत्री शाह मेहमूद कुरैशी से बातचीत हुई है। कूटनीतिक सूत्रों के मुताबिक पोंपियो की पाकिस्तानी हुक्मरानों के साथ हुई मुलाकात पर टू प्लस टू वार्ता में चर्चा की जाएगी।

पाकिस्तान के साथ भारत के रिश्ते अमेरिका व भारत के व्यापक रणनीतिक रिश्तों पर भी असर डालेंगे। अमेरिका की चाहत है कि भारत अपनी सैन्य तैयारियों को हिंद-प्रशांत महासागर की चुनौतियों के मद्देनजर तैयार करे जबकि वह यह भी चाहता है कि पाकिस्तान अफगानिस्तान में शांति व वहां के आतंकियों को हराने में ज्यादा से ज्यादा ध्यान दे।

बुधवार को पोंपियो से मुलाकात के बाद विदेश मंत्री कुरैशी ने संवाददाता सम्मेलन में इस बारे में अमेरिकी प्रस्ताव परोक्ष तौर पर उजागर भी किया। कुरैशी ने कहा कि अगर पूर्वी सीमा (भारत के साथ) पर हमारे साथ छेड़छाड़ होगी तो हम पश्चिमी (अफगानिस्तान के साथ) सीमा पर कैसे ज्यादा ध्यान दे सकेंगे?

भारतीय विदेश मंत्रालय के अधिकारी भी पूर्व में पाकिस्तान, चीन व रूस के बीच किसी गठबंधन बनने के आसार पर अपनी चिंता जता चुके हैं। भारत व अमेरिका के रिश्ते लगातार प्रगाढ़ होते देख रूस ने इधर कई बार कहा है कि वह पाकिस्तान के साथ सैन्य सहयोग बढ़ाने को तैयार है। कूटनीतिक जानकार लंबी अवधि में इसे भारत के हितों के लिहाज से बहुत अच्छा नहीं मानते हैं। वैसे भी पाकिस्तान में नई सरकार आने के बाद भारत के साथ उसके रिश्तों को लेकर कुछ सुगबुगाहट दिखाई दी है।

पीएम नरेंद्र मोदी ने न सिर्फ इमरान खान से टेलीफोन पर बात की है बल्कि उन्हें एक पत्र भी लिखा जिसमें कहा, “पाकिस्तान के साथ भारत अच्छे रिश्ते बनाने को लेकर वचनबद्ध है। इस क्षेत्र की जनता की भलाई के लिए दोनों देशों के बीच सार्थक व रचनात्मक सहयोग होना चाहिए।”

दूसरी तरफ, पाकिस्तानी पीएम इमरान खान पहले ही कह चुके हैं कि अगर भारत की तरफ से शांति बहाली के लिए एक कदम बढ़ाया जाता है तो वह दो कदम चलने के लिए तैयार हैं। भारत व पाकिस्तान के बीच अंतिम आधिकारिक वार्ता दिसंबर, 2015 में इस्लामाबाद में हुई थी। उसके बाद भारत के पठानकोट सैन्य अड्डे पर पाकिस्तानी आतंकियों के हमले पर भारत ने बाकी वार्ताओं को टाल दिया था।

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