विदर्भ को पहली बार रणजी ट्रॉफी के फाइनल में पहुंचाने वाले तेज गेंदबाज रजनीश गुरबानी इन दिनों टूर्नामेंट में सबसे चर्चित शख्स बन चुके हैं। कोलकाता के ईडन गार्डन्स में खेले गए सेमीफाइनल में उन्होंने कर्नाटक के खिलाफ मैच में 12 विकेट झटके। पहली पारी में उन्होंने 5 और दूसरी में 7 विकेट लिए। उनकी लाइन और लेंथ कमाल की थी। वह दोनों तरफ गेंद को स्विंग कराने का माद्दा रखते हैं। इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में गुरबानी ने बताया कि वह मैच से पहले रातभर ठीक से सो नहीं पाए। उन्होंने कहा, ”मैं पहले 12.30 बजे उठा फिर 4.30 बजे। दोनों बार मुझे लगा कि आखिरी दिन मुकाबला शुरू होने वाला है”। विदर्भ का यह खिलाड़ी जब मैदान पर उतरा तो वह काफी नर्वस था।

ईडन गार्डन्स के पिच क्यूरेटर सुजान मुखर्जी ने गुरबानी की तुलना युवा भुवनेश्वर कुमार से की। उन्होंने कहा कि 2008-09 में फर्स्ट क्लास क्रिकेट में सचिन तेंदुलकर को पहली बार जीरो पर आउट करने वाले भुवनेश्वर की तरह गुरबानी का रनअप भी अच्छा है। दोनों में काफी समानताएं हैं। गुरबानी भी 132-133 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गेंदबाजी करते हैं। वहीं विदर्भ के रणजी कोच चंद्रकांत पंडित ने गुरबानी को शर्मीला शख्स बताया। उन्होंने कहा कि वह ड्रेसिंग रूम में ज्यादा बोलता नहीं है।

मैच के बाद गुरबानी ने कहा, “अंतिम विकेट लेने और चंदू सर की प्रतिक्रिया देखने के बाद मैं काफी भावुक हो गया था।” गुरबानी ने कहा, “मैं पूरी रात काफी घबराया हुआ था। पहले मैं 12:30 बजे उठा, मुझे लगा कि सुबह के छह बज गए हैं। इसके बाद में 4:30 बजे उठा और इसके बाद मैं सो नहीं सका। पांच बजे उठकर मैं तैयार होने लगा और छह बजे तक तैयार हो गया। दो बार क्वॉर्टर फाइनल में मात खाने के बाद इस साल हम फाइनल खेलने को लेकर काफी प्रतिबद्ध थे।” उन्होंने कहा, “जब मैं मैदान पर गया तो कोच ने मुझे प्रोत्साहन दिया और किसी तरह मुझे शांत किया।

मैदान के अंदर जब विकेट नहीं मिल रहे थे तो मुझे काफी परेशानी हो रही थी। इसके बाद मेरे सीनियर खिलाड़ियों, कप्तान और चंदू सर ने मुझे शांत रहने को कहा।” युवा गेंदबाज ने कहा कि भारतीय टीम के लिए खेलने वाले उमेश यादव के टीम में रहने से उन्हें काफी मदद मिली। उन्होंने कहा, “उमेश यादव के रहने से मुझे काफी मदद मिली। उमेश भईया के साथ गेंदबाजी की शुरुआत करना मेरे लिए सपने के सच होने जैसा है। वह एक छोर से गेंदबाजी कर रहे थे और मैं उन्हें देख रहा था। वह मेरे प्ररेणास्त्रोत हैं और पसंदीदा गेंदबाज भी।” गुरबानी ने सीविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। उन्होंने अपना पहला लिस्ट-ए मैच बीई के आखिरी सेमेस्टर को 80 प्रतिशत के साथ पास करने के बाद खेला था।

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