Not ready to accept the rules caterer packed food found in trains

 

इंदौर। स्टेशन और ट्रेनों में मिलने वाले खाने को लेकर रेलवे कितना गंभीर है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि खाने की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए नियम कैटरर ही मानने को तैयार नहीं हैं। दस दिन पहले रेलवे ने पैक्ड फूड को लेकर नए नियम बनाए हैं, जिसमें कैटरर को अब पैकेट पर सप्लाय का नाम बताना अनिवार्य किया है। मगर व्यवस्थाएं अभी भी पुराने ढर्रे पर चल रही हैं। नए आदेश में कीमतों के बारे में कोई जिक्र नहीं होने से कैटरर यात्रियों से मनमाने दाम वसूल रहे हैं।

कैटरिंग की दर्जनों शिकायतें मिलने के बाद पूर्व रेल मंत्री ने स्टेशन और ट्रेनों में खाने की गुणवत्ता जांचने पर जोर दिया। रेलवे अफसरों ने इसके लिए सभी बड़े स्टेशन का निरीक्षण भी किया। रतलाम मंडल ने भी इंदौर जैसे ए ग्रेड स्टेशन पर जांच की, जिसमें ट्रॉली और जूस सेंटर तक ही कार्रवाई सीमित रह गई। इस बीच 19 सितंबर को रेलवे बोर्ड ने पैक्ड फूड को लेकर नए नियम जारी कर दिए, जिसमें सप्लाय का नाम, पैकेजिंग की तारीख, वजन और वेज-नॉन वेज का प्रतीक अनिवार्य किया गया है। ये नियम स्टेशन और चलती ट्रेन में मिलने वाले खाने पर लागू किए गए हैं। आदेश रतलाम मंडल को भी मिल चुका है, जो उसने सभी वेंडर, कैटरर सहित रेस्त्रां संचालकों को भेज दिया है लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा है। लंबी दूरी की ट्रेनों में कैटरर बीच में यात्रियों से खाने का ऑर्डर लेते हैं, जिन्हें निर्धारित स्टेशन पर पहुंचने के दौरान डिलिवरी की जाती है। इन फूड पैकेट पर कीमत नहीं होने से कर्मचारी दोगुना राशि वसूलते हैं। यह व्यवस्था अवंतिका, निजामुद्दीन, पटना समेत आदि एक्सप्रेस ट्रेनों में है।

शिकायत मिलने पर करेंगे कार्रवाई

रेलवे बोर्ड से आदेश मिल चुका है। इसके लिए अधिकारियों को निरीक्षण करने को कहा गया है। वैसे पहले ही रेलवे ने पैकेट को लेकर दाम तय कर रखे हैं। इसके बावजूद अधिक राशि वसूलने की शिकायत मिलती है तो कार्रवाई की जाएगी।

-विपुल सिन्हा, सीनियर डीसीएम, रतलाम मंडल

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