सतपुड़ावाणी ब्यूरो,भोपाल | दिन भर धुप, छओ , बरसात जिसे मुसम मै बाचरे बच्चे पन्नी बीनने के बाद रात को दो रूखी-सूखी रोटी ही नसीब होती है| उसमे भी साहब ने कहा की आज बहार कार्यक्रम है वाह चलेंगे बढ़िया भोजन मिलेगा और गर्म कपड़े भी दिए जाएंगे |

सुबह घर से बहुत खुश हो कर और यह सोच कर निकले थे की आज तो बढ़िया – बढ़िया खाना मिलेगा और पेट भर के खाएंगे |

कार्यक्रम के चलने के दौरान भी वह यही देख रहा थे की भोजन कब मिलेगे और कब हमारी भूक मिटेगी |
अतिथि के इंतजार में पेट में सिलवटें आ गई थीं फिर भी रुके रहे तो सिर्फ स्वादिष्ट भोजन की आस मे और जब भोजन मिलने की बरी आई तो आधे से ज़्यादा बच्चो को भोजन नहीं मिले और वह भूखे ही रहा गए | वही दूसरी तरफ अफसरो ने बहुत माज़ो से भर पेट होटल भोजन किया |

अंतरराष्ट्रीय बाल अधिकार दिवस(International Children Rights Day) पर सोमवार को राज्य बाल संरक्षण आयोग ने पन्नी बीनने वाले बच्चों के लिए एनआईटीटीआर सभागार में बाल संसद का आयोजन किया । इसमें बच्चों की परेशानियों को जानना था, लेकिन वहां बच्चों को सिर्फ नेताओं के नाम ही बताए जाते रहे । करीब 1 50 बच्चे आए थे , जिन्हें एक कॉलेज प्रबंधन की तरफ से उपहार स्वरूप गर्म कपड़े जरूर बांटे गए ।

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 यह सभा , यह कार्यक्रम बच्चो के लिए ही रखा गया था और बच्चो को ही इस कार्यक्रम मे अपमानित होना पड़ा न ही इस कार्यक्रम मे उनके आधिकेरो के बारे मे बतया गया और न ही उनकी परेशानिया सुनी गयी |

कार्यक्रम के बाद बच्चो के लिए खाने की व्यवस्था मे भी गड़बड़ी थी बहुत सारे बच्चे भूखे ही लोट गए जबकि अफसरों, कर्मचारियों और अन्य खास लोगों ने होटल में जाकर खाना खाया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि स्कूल शिक्षा राज्यमंत्री दीपक जोशी, मानवाधिकार आयोग के सदस्य सरबजीत सिंह भी उपस्थित थे। इनका कहना है

कार्यक्रम में 150 बच्चे थे। बच्चों के लिए खाना कम नहीं पड़ा, बल्कि हमारे अफसर व कर्मचारियों के लिए कम पड़ गया, जिन्हें होटल में ले जाकर खिलाया-डॉ. राघवेन्द्र शर्मा, अध्यक्ष, राज्य बाल संरक्षण आयोग |

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