सतपुड़ावाणी ब्यूरो,भोपाल:  हमरा देश आज़ाद हुए 70 साल हो गए मगर आज भी समाज की वही पुरानी सोच है, महिलाओ को ले कर महिलाओं को समानता, स्वतंत्रता और आर्थिक-सामाजिक न्याय पाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। हम समृद्धि पाने के लिए देवी लक्ष्मी, ज्ञान के लिए मां सरस्वती और शक्ति हासिल करने मां दुर्गा की पूजा करते हैं, लेकिन महिलाओं के प्रति सोच उल्टी रखते हैं। समाज को अपनी धारणा बदलने की जरूरत है।
यह विचार मध्यप्रदेश के माननीय ममतानी जी है  जिनसे एक विशेष मुलाकात में उन्होंने कहा कि समाज की सोच बदलना जरूरी है,महिलाओं को भी अपनी धारणा बदलनी होगी। अध्यक्ष ने कहा कि इस साल अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस (International Human Rights Day)को नारी सशक्तिकरण पर केन्द्रित किया जा रहा है। इस मौके पर भोपाल में 10 दिसंबर को विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। यह ज्वलंत मुद्दा है और हाल ही में हुई घटनाओं के मद्देनजर सामयिक भी है। पुलिसकर्मी पे  की जाया कारवाही |
 प्रदेश मे हो रहा महिलाओ पे अत्याचार उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं होती अच्छे से रोज़ महिलाए इन अत्याचार को सहन  करती है किडनैप,गैंगरेप(kidneping,gangrape)घटनाओ को पुलिस को रोक लगना मे सजक रहना होगा| सुप्रीम कोर्ट(suprem court) के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं कि ज्यादती की शिकार महिला की एफआईआर तुरंत ही लिखनी पड़ेगी। ‘जीरो” पर एफआईआर ‘कान्सेप्ट” को प्रभावी बनाने के लिए आयोग भी पहल करेगा। शिकायत लिखने में विलंब करना अथवा नहीं लिखना भारतीय दंड संहिता की धारा 166ए के तहत दंडनीय अपराध है। संबंधित पुलिसकर्मी पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान भी है।
छात्रों को करेंगे पुरस्कृत
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस(International Human Rights Day) पर विधि महाविद्यालयों में वाद-विवाद प्रतियोगिताएं कराई जाएंगी। नारी सशक्तिकरण पर केन्द्रित अन्य कार्यक्रम भी होंगे। विजेता छात्रों को आयोग की तरफ से पुरस्कार व प्रमाण-पत्र दिए जाएंगे। प्रथम तीन श्रेष्ठ छात्रों को अपना प्रस्तुतिकरण मुख्य आयोजन में करने का मौका भी देंगे।
Tag’s:  Atrocities against women , kidneping  , gangrape , suprem court , International Human Rights Day

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