People still not giving up open defecation habit toilet construction now in shadow of police

खुले में शौच जाने की लोगों की आदत नहीं छूट रही है।

रायसेन। खुले में शौच (open defecation) जाने की लोगों की आदत नहीं छूट रही है। पंचायत और प्रशासनिक अधिकारियों के समझाने पर ग्रामीण न केवल अजीबो-गरीब तर्क दे रहे हैं, बल्कि उनकी समझाइश का विरोध भी कर रहे हैं।इधर, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के 19 नवंबर तक जिले को खुले में शौच से मुक्त करने के एलान के बाद अफसरों की सांसें फूल हुई हैं। महज 19 दिन में जिले को पूरी तरह ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) कराने के लिए अब पुलिस(Police) की मदद ली जा रही है। अलग-अलग विभागों के 70 प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा जिले के 20 थानों की पुलिस को भी गांवों में टॉयलेट बनवाने के लिए तैनात किया गया है।

प्रशासनिक अधिकारियों की टीम पंचायत न्यूसेंस निवारण अधिनियम 1993 के तहत जुर्माना सहित अन्य कार्रवाई के बारे में बात रही है। इस पर कई गांवों में विवाद की स्थिति बन रही है। इससे निपटने के लिए पुलिसिया अंदाज में समझाइश दी जा रही है। 17 सितंबर को सांची के रतनपुर गांव में मुख्यमंत्री ने घोषणा कर दी कि 19 नवंबर को विश्व टॉयलेट दिवस तक प्रशासन जिले को पूरी तरह ओडीएफ करे। इसके बाद शेष बचे 29 हजार टॉयलेट बनवाने में प्रशासन की टीम जुटी हुई है।

जिले में बनना है 2 लाख 12 हजार टॉयलेट

जिलेके 1420 गांवों में 2 लाख 12 हजार टॉयलेट बनना हैं। अब तक 1 लाख 98 हजार टॉयलेट बन चुके हैं। शेष 14 हजार टॉयलेट बनवाना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। वन क्षेत्र सहित पथरीले इलाकों में सबसे ज्यादा परेशानी सामने आ रही है। भोजपुर के पास कीरतपुर, भोपाल मार्ग पर पिपलखिरिया, राजीवनगर, बरेली के पास खरगोन, सांची में सलामतपुर, बेगमगंज के पास सुल्तानगंज, समनापुर और बाड़ी ब्लाक के भारकच्छ में टॉयलेट बनवाना प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है।

ग्रामीणों के यह अजीबो-गरीब तर्क

– अफसरों से गांव के बुजुर्ग कह रहे हैं कि आप लोग कैसी बात कर रहे हैं। घर में एक ही शौचालय है, उसमें बहू, बेटी जाएगी तो हम कैसे उसका उपयोग करेंगे।

– गांव में जा रही टीम ग्रामीणों को खुले में शौच के नुकसान बता रही है कि तो ग्रामीण कह रहे हैं कि बरसों से खुले में जाने की आदत है। इसलिए इस आदत को बदल नहीं पा रहे हैं।

जहां विरोध हो रहा, वहां पुलिस की मदद भी लेनी पड़ रही

जिले मेे1 14 हजार शौचालय और बनने हैं। कई गांव में लोग अभी भी पुरानी भ्रांतियां पाले हुए हैं। ऐसे लोगांे को हमारी टीमें समझा रही हैं, जो नहीं मान रहे अड़ रहे हैं या विरोध कर रहे हैं, उन्हें सख्ती से भी बताया जा रहा है। कुछ जगह पुलिस की मदद भी लेनी पड़ रही है – विनोद सिंह बघेल, जिला कार्यक्रम अधिकारी, स्वच्छता अभियान

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