एबीपी न्यूज के घंटी बजाओ का असर है कि आजकल वाटस अप पर आने वाले संदेशों में सरकारी योजनाओं में हो रही लापरवाहियों की जानकारियां ज्यादा आने लगीं हैं। ऐसा ही एक संदेश पीएम आवास योजना में बालाघाट जिले में हो रहे फर्जीवाडे का आया था। पहले तो वाटसअप की विश्वसनीयता पर संदेह हुआ मगर पहले सिर्फ जानकारी फिर कुछ दिनों के बाद फोटो तो फिर वीडियो भी जब विवेक पवार ने भेजा तो लगा कि इस खबर में गजब दम है। बालाघाट तक आने जाने की तारीख तय हुयी मगर इस बीच में जब ये पता चला कि विधानसभा में ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव और उनके एसीएस राधेश्याम जुलानिया पत्रकारों को कोई नया एप बता रहे हैं तो हम भी पहुंचे।
मंत्री जी अपने कक्ष में सामने बैठे पत्रकारों के सामने एमपी के 52 हजार गांवों में ग्रामीण विकास विभाग की बह रही गंगा का ब्यौरा दे रहे थे। वो बता रहे थे कि पीएम आवास योजना में अब तक तीन लाख पचासी हजार घर बन गये है। चार हजार घर हर रोज पूरे हो रहे हैं। इस साल के अंत तक पांच लाख पक्के घर बन जायेंगे यदि एक घर में चार लोग भी रहते हैं तो बीस लाख लोगों के पक्के घर का सपना पूरा हो जायेगा। साधु साधु,,
बातें सुनकर लगा कि शिवराज जी के स्वर्णिम मध्यप्रदेश बनने में अब ज्यादा देर नहीं है सो हम अगली सुबह मंडला के आगे बालाघाट जिले की बैहर तहसील के पांडुतला गांव में खडे थे। मंडला को रायपुर से जोडने वाली फार लेन सीमेंटेड सडक के किनारे ही बन रहा था सेमू मरावी का घर। घर क्या था चारों तरफ दीवारें उठीं थीं छत ढलने की तैयारी हो। हां घर के बाहर कुछ लिखा था जिसे चूने से पोतकर मिटाने की कोशिश की गयी थी। यहीं मिले भागचंद मरावी जो गांव के पंच हैं और उनके दादा के नाम पर ये मकान बन रहा है। पहले तो भागचंद ने गोलमोल बातें की मगर जब हमने उनको पीएम आवास योजना की साइट पर उनका तैयार मकान का फोटो ही उनको दिखा दिया तो वो रास्ते पर आये। साइट पर उनके अधबने मकान पर पर्दा लगाकर उनके दादा को बैठाकर फोटो अपलोड कर बता दिया गया था कि ये मकान पूरा हो गया। अब उन्होंने सच उगलना शुरू किया कि साहब मकान की किष्तें तो आ गयीं है मगर ये फोटो बहुत पहले ही खींच कर इसे तैयार दिखा दिया मगर आप जैसे एक दो लोग और पूछने आये तो हमने साहब के कहने पर पीएम आवास की इस मुहर को मिटा दिया है।
दरअसल गरीब निराश्रित और विधवाओं को पक्का मकान देने के लिये 20 नवंबर 2016 से पीएम आवास योजना षुरू की गयी है जिसमें पक्का मकान बनाने के लिये एक लाख तीस हजार रूप्ये दिये जाते हैं। योजना बडी फुलप्रूफ है। पूरा पैसा किश्तों में हितग्राही के खाते में जाते हैं मगर बेइमानी करने वाले भी कहां कम हैं। संजारी गांव में ही कई मकान ऐसे मिले जिनकी सामने की दीवार पर रंगरोगन कर हितग्राही के नाम के साथ नरेन्द्र मोदी और शिवराज सिहं का नाम लिख कर मकान पूरा होने की सूचना लगा दी गयी। नामों की फेहरिस्त देखकर लगता है कि इस घर में रहने वालों के नाम नरेन्द्र मोदी और शिवराज सिहं भी है। मगर ना तो मकान में प्लास्टर हुआ है ना रसोई का गैस रखने का प्लेटफार्म। मकानों की छतें भी कुछ दिन पहले ही ढली हैं हां रंगरोगन कर हितग्राही की तस्वीर जरूर दीवाली के पहले खींच कर फाइलों पर इन गरीबों का गृहप्रवेश करा दिया गया। इसी गांव में रूपलाल मिले जिनके बेटे और बेटी के नाम पर आवास है। मगर दोनों को जोड कर बडा घर बन रहा है मकान आधा अधूरा बिना छपाई का है तो फोटो कहां खींचे इससे बचने के लिये नया तरीका निकाला है। पहले से ही तैयार बैनर पर नाम लिखा कर लाया गया रूपलाल के बेटे बेटी को खडाकर फोटो खींची और साइट पर डाल कर इनको भी नये मकान का मालिक बता दिया। ये मकान देख कर साफ था कि मकान जमीन पर कम फाइलों पर ज्यादा तैयार हो रहे थे और इन्हीं फाइलों के आंकडे देख हमारे ग्रामीण विकास मंत्री भारी आवाज में भावुक हो कर पीएम आवास योजना में देश में अब्बल नंबर पर रहने का दावा कर रहे थे तो उनके एसीएस जुलानिया साहब कह रहे थे कि मीडिया ने मेरी छवि जनरल डायर की बना दी है, मगर जब किसी बेघर को पीएम आवास का घर मिलता है तो मुझे बहुत खुशी होती है। सामाजिक कार्यकर्ता विवेक कहते हैं कि भेापाल में बैठे अफसरों के जल्दबाजी के दवाब, डांट फटकार, बरखास्त करने की धमकी और लक्ष्य जल्दी पूरा करने पर इनाम के लालच ने फील्ड में काम करने वाले नीचे के कर्मचारियों से ये गडबडियां करायी गयीं हैं। अब आपकी खबर चलेगी नीचे के कुछ कर्मचारी बरखास्त होंगे मगर धमकाने और दबाव बनाने वाले अफसरों का कुछ नहीं बिगडेगा। सच कहा विवेक ने कहानी चलने के बाद एक दर्जन से ज्यादा फील्ड पर काम करने वाले कर्मचारियों को क्यों ना आपके खिलाफ कार्रवाई की जाये के कारण बताओ नोटिस दे दिये गये हैं। मगर जब एक जिले की एक तहसील के ये हाल हैं तो बाकी जिलों में मकान कैसे बन रहे हैं अंदाजा लगाने से ही डर लगता है।
ब्रजेश राजपूत,
एबीपी न्यूज
भोपाल

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