अशोकनगर। जैसे जैसे उपचुनाव की घोषणा में देरी हो रही है मतदाताओं से पंजे की पकड़ ढीली होती जा रही है। शुरुआती रुझानों में मुंगावली में कांग्रेस का जो मजबूत जनाधार दिखाई दे रहा था, समय मिलने पर भाजपा ने उसमें सेंध लगा दी है। पिछले दिनों में जहां कांग्रेस नेतृत्व ने इस क्षेत्र में कम ही आमद दर्ज कराई है तो प्रदेश भाजपा के आला नेता गांव गांव जनसम्पर्क कर रहे हैं। यहां तक कि गृहमंत्री सरीखे भी आठ-दस गांवों की खाक छान चुके हैं। उपचुनाव में देरी का भाजपा को जहां फायदा मिल रहा है तो कांग्रेस का जनाधार खिसकता जा रहा हैं। हालांकि जनाधार किस पार्टी की तरफ जाता है इसका काफी कुछ विश्लेषण प्रत्याशियों के नाम जारी हो जाने के बाद ही किया जा सकेगा। लेकिन अभी तक सामने आई तस्वीर में एक महीने पहले भाजपा, मतदाताओं तक पहुंच के मामले में बहुत पीछे थी अब कांग्रेस की टक्कर पर आ गई है।

छप्पर फाड़ के हो रही सौगातों की बरसात :

शासन में बैठी भाजपा मुंगावली में चुनाव जीतने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए भाजपा ने अब तक कई जनसंवाद कार्यक्रमों के जरिए जहां जनता से मुखातिब कर दिया है तो स्वयं मुख्यमंत्री से मिलाप के लिए भी हर रोज सैंकड़ों क्षेत्रवासी बसों से भोपाल भेजे जा रहे हैं। सांसद के पास अपनी निधि ख़र्च करने के अलावा ज्यादा कुछ नहीं है जिसके चलते भाजपा द्वारा मतदाताओं की बढ़ायी जा रही हसरतें वह कब तक थामेंगे, कुछ कहा नहीं जा सकता।

टर्निंग प्वाइंट रही सिंधिया की सभा:

अंदेशा था कि नवंबर के महीने में मुंगावली उपचुनाव के लिए निर्वाचन तिथि घोषित हो जाएगी। स्वर्गीय श्री कालूखेड़ा के देहावसान के बाद जैसे ही क्षेत्र में राजनैतिक गतिविधियों ने जोर पकड़ा तो माहौल भी चुनावी हो गया था। पहले मुख्यमंत्री की सभा फिर तमाम कांग्रेसी दिग्गजों का श्रद्धांजलि सभा के बहाने मंच पर एकजुट होना। इसके कुछ ही समय के अंतराल में भाजपा के बड़े नेता और प्रदेश शासन के मंत्रियों ने मुंगावली में कार्यकर्ता सम्मेलन में शिरकत के द्वारा इस धारणा को मजबूत कर दिया था कि कैलेंडर बदलने से पहले विधानसभा के परिणाम आ जाएंगे। लेकिन टर्निंग प्वाइंट साबित हुई सिंधिया की दलित महासभा। विधानसभा क्षेत्र के बंगला चौराहा पर कांग्रेस सांसद और ग्वालियर चम्बल के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने समसामयिक मुद्दों को उठाते हुए दलित सम्मेलन के जरिये मतदाताओं पर अपनी जोरदार पकड़ बता दी। सांसद की इस सभा में हजारों लोग पहुंचे। लगभग गरजते अंदाज में सिंधिया ने प्रदेश सरकार में हमला किया। इसी सभा की चर्चा जब प्रदेश स्तर पर पहुंची तो भाजपा कार्यसमिति को लगा कि मुंगावली में अभी और मेहनत की जरूरत है। चूंकि चर्चा यह भी थी कि उपचुनाव की तारीख जल्द ही घोषित हो सकती है इसलिए भाजपा नेताओं की पेशानी पर बल आ गए। लेकिन संयोगवश निर्वाचन आयोग ने उपचुनाव की तिथियां जारी करने में देरी दिखाई, जिसका सीधा सीधा मौका भाजपा ने भुनाया।

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