पवन बाली | दीपोत्सव , यानि दीपो का त्यौहार , अंधेरो पर उजालो की जीत का त्यौहार ,या फिर यूं कहे की अच्छाई की बुराई पर जीत का त्यौहार ,कुल मिलाकर दीपावली या फिर दिवाली अथवा दीप मलिखा का त्यौहार |

वैसे तो कल्युग के घोर अंधकार में और पध हो चुकी राजनीति के चलते उजालो की बात करना वैसे ही अप्रसांगिका है जैसे कोई कामना करे की अमावस की अंधियारी रात में पूर्णाकार चन्द्रमा के दर्शन हो जाए | लेकिन जिस देश की न्यायपलिका और मीडिया अपने राष्ट्रीय दायित्वों के प्रति जागरूक हो , वहां अमावस की रात को भी पूर्णिमा से ज्यादा ओजपूर्ण दीपावली की रात में तब्दील किया जा सकता हे |

Platter of Diwali sweets

क्यों कि प्रबुद्ध वर्ग जिसे सौभाग्य से अख़बार नवीस भी. कहा जाता हे , यह किसी युग में राज और लोक दोनों नीतियों को नीतियों को पथ भुषड नहीं होने देता। जैसे वर्तमान को ही लें। सत्ता आती हे ,कभी चली जाती हे।

कभी एक दल राज गददी पे होता हे , कभी दूसरा तो कभी एक साथ बोहोतभी ने दावे किये ,और कर रहे हे। गरीबी हारेगी , नहीं हारी। कहा रोजगार देंगे , बेरोजगारी बढ़ती गई। सर्व धर्म सम्भाक की बाते हुई , लेकिन साम्प्रादायिका भेद भाव की चाले राजनेताओं बना दी। यानि की माहौल रिराशाजनक हे। लेकिन निराश होने की ज़रूरत नहीं , क्यों की उस देश का पत्रकार गौरव मंद और जागरूक हे। वो भारत देश को अंधकार में डूबने नहीं देगा। दीपक की लौ की तरह भारत का मीडिया सियासी , भ्रस्ट अंधकार से लड़ेगा और ऐक दिन रामराज की स्थापना का संवादक बनेगा। उन्ही विश्वासों के साथ आप सभी को सतपुरावाणी परिवार की ओर से दीपावली की ढेर सारी शुभकामनाए।

पवन बलि , एंड टीम

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