भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। देश की महारत्न कंपनी भेल की भोपाल इकाई में अब कर्मचारी/मजदूर यूनियनों की सुनवाई नहीं हो रही है। भेल प्रबंधन अपनी मनमर्जी चला रहा है। नियमानुसार कर्मचारियों से जुड़े फैसले लेने से पहले भेल प्रबंधन तीनों प्रतिनिधि यूनियनों के साथ बैठक कर सहमति के बाद ही फैसले लेता है, लेकिन अब प्रबंधन सिर्फ नाम के लिए बैठक करता है और अपने हिसाब से फैसले ले लेता है। भेल की तीनों प्रतिनिधि यूनियन राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस (इंटक), भेल ऑल इंडिया एंप्‍लाइ यूनियन (एबु) और भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) के पदाधिकारियों की नहीं सुनी जा रही है।

यूनियनों के कहने पर भेल प्रबंधन न तो संस्‍थान में फिर से अनुकंपा नियुक्ति शुरू कर रहा है और न ही एक करोड़ स्र्पये के टर्म इंश्योरेंस की सुविधा दे पा रहा है। इसके अलवा भेल टाउनशिप में बदहाल हुई सड़कों, पार्क सहित अन्य की मरम्मत भी नहीं की जा रही है। इतना ही नहीं, कोरोना काल में लगातार भेल कर्मचारियों की सुविधाओं में कटौती करता आ रहा है। स्थिति यह है कि यूनियनें वेतन के साथ मिलने वाली सुविधाओं में हुई 50 कटौती को फिर से 100 फीसद तक नहीं करा पा रही हैं। इससे कर्मचारियों का सकल वेतन 10 से 12 हजार रुपये कम हो गया है। इसके अलावा सोसायटी व ठेका श्रमिकों को वेतन भी समय पर नहीं मिल पा रहा है। भेल इंटक के प्रदेशाध्यक्ष व वरिष्ठ नेता आरडी त्रिपाठी, एबु के राष्ट्रीय महासचिव रामनारायण गिरि व बीएमएस के अध्यक्ष विजय कठैत सहित अन्य यूनियनों के नेताओं का भी असर कम होता दिख रहा है। अब स्थिति यह है कि कोरोना का बहाना लेकर भेल कर्मचारियों की सुविधाओं में लगातार कटौती होती जा रही है। यूनियनें एकजुटता से धरने-प्रदर्शन भी नहीं कर पा रही हैं।

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