गुजरात चुनाव के एक्जिट पोल ने एक बार फिर यह संकेत दे दिया है कि पिछले लोकसभा चुनाव से शुरू हुआ मादी लहर का ज्वार अभी भी मतदाता के दिलो दिमाग पर असर बनाए हुए है। बात नोटबंदी की हो या जी.एस.टी. की या फिर मामला पाटीदार आंदोलन का हो। हर एक मसले को जैसे मोदी लहर ने अपने में समाहित कर लिया है।

इससे एक बात बहुत साफ हो गई है कि राजनेताओं के लिए भी मतदाताओं के मन को पढ़ पाना लगभग असंभव सा हो गया है। वर्ना तो कांग्रेस जिस उत्साह के साथ गुजरात चुनाव में दो दो हाथ कर रही थी, उसे देखकर ऐसा लग ही नही रहा था कि उसका सारा किया धरा सब गुड़ गोबर हो जाने वाला है। यदि इस पार्टी को थोड़ी सी भी आशंका होती कि भाजपा का प्रदर्शन पिछले चुनाव की अपेक्षा और ज्यादा आक्रामक होने वाला है तो हो सकता है कि राहुल गांधी की ताजपोशी थोड़े समय के लिए और टाली जाती।

या फिर यों कहें कि उन्हें कांग्रेस की कमान सौंपने का निर्णय कम से कम गुजरात चुनाव के दौरान तो नही लिया जाता। ताकि किसी को यह उलाहना देने का अवसर तो न मिलता कि अध्यक्ष बन कर भी राहुल गांधी ने कौन सा भारी परिवर्तन कर दिखाया। लेकिन हुआ वही जो बार बार प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी कह रहे थे कि गुजरात में भाजपा पुन: सरकार बनाएगी और स्पष्ट बहुमत के साथ बनाएगी। इस चुनाव के औपचारिक परिणाम क्या होंगे, इस बात को लेकर सियासी समीक्षकों में ज्यादा मतभेद नही हैं। इसलिए यह माना जा सकता है कि सीटें कम ज्यादा हुई भी तो यह आंकड़ा 5-10 प्रतिशत से ज्यादा के अंतर वाला नही रहेगा।

यानि कि आने वाले चुनाव परिणाम गुजरात में एक बार फिर से भाजपा की सरकार बनवाने जा रहे हैं। और फिर सिर्फ गुजरात ही क्यों हिमाचल में भी अब कांग्रेस की बजाय भाजपा की सरकार बनने के स्पाष्ट संकेत मिल रहे हैं। इसका मतलब गुजरात केवल इसलिए नही जीते कि वो प्रधान मंत्री का गृह राज्य है। बल्कि भाजपा यह कह सकती है और दिख भी यही रहा है कि भारत में कम से कम अभी तक तो मोदी का जादू मतदाताओं के सिर चढक़र बोल रहा है। तो फिर आसानी से यह अनुमान लगाया जा सकता है कि अगले साल जो दीगर प्रांतों के विधान सभा चुनाव होना है, वहां पर भी विपक्ष और खासकर कांग्रेस को भारी संकटों का सामना करना होगा। अभी से यह तय करना तो मुश्किल रहेगा कि भावी चुनावों में किसकी हार होगी और किसके हिस्से में जीत आएगी।

लेकिन यह आकलन आसानी से किया जा सकता है कि गुजरात और हिमाचल की तरह वहां भी भाजपा से लोहा लेना आसान कार्य नही रहेगा। ये आश्चर्य की बात ही है कि चारों ओर अभी भी नोटबंदी और जी.एस.टी. की कष्टदायी चर्चाएं हैं। पाटीदार आंदोलन की आक्रामकता भी पुराना नही हुआ है। यह भी सही है कि नोटबंदी और जी.एस.टी. के चलते काम धंधों और खासकर छोटे व मझोले उद्योगों पर प्रतिकूल प्रभाव देखने में आया है। लेकिन जब बात चुनाव परिणामों की हो रही है तो मीडिया का हर एक पहलू एक ही बात उद्घोषित कर रहा है कि दोनों ही राज्यों में भाजपा की ही सरकारें बन रही हैं तो फिर अब मोदी की कार्य प्रणाली की बात होना लाजिमी है।

आखिर एसी क्या बात है उनके व्यक्तित्व और कृतित्व में जो कम से कम विपक्ष की समझ में तो नही आ रहा है। क्यों कि यदि आ जाता तो फिर मीडिया जो संभावनाएं दिखा रहा है, वो कम से कम इतना इक तरफा तो नही होता। यदि विपक्ष उनकी रणनीति को समझे बगैर उनका विरोध करता रहा तो इसे बेकार में ऊर्जा को जाया करने का उद्यम ही कहा जाएगा। अत: विपक्ष को आगामी किसी भी संघर्ष से पहले जनहित के मुद्दों को उठाने के साथ साथ मोदी की कार्य प्रणाली का भी तोड़ तो निकालना पड़ेगा। जैसा कि विदित है कि 2018 में मध्य प्रदेश के विधान सभा चुनाव भी होने हैं। यहां भी वर्तमान सरकार के खिलाफ बहुत सारे मुद्दे एक प्रकार से फैले पड़े हैं।

इसमें भी दो राय नही कि फैल फूट होने के बावजूद कांग्रेस जमीनी स्तर पर प्रदेश सरकार का बड़े ही धार दार तरीके से विरोध कर रही है। और उसे उम्मीद है कि हालात ऐसे ही बने रहे तो भाजपा के हाथ से सरकार छीनने का काम ज्यादा दुश्वार नही रहेगा। लेकिन बात इतनी ही समझनी काफी नही है। समझने की बात तो ये है कि नरेंद्र मोदी अब केवल गुजरात के नेता नही रह गए हैं। उन्होंने आंरिक मामलों के साथ साथ विदेशों में अपनी जो धाक जमाई है, वो आम आदमी के मन में घर कर गई है।

शायद यही वजह है कि जनता मानती तो है कि मोदी की कार्यप्रणाली से उसे परेशानी हो रही है और थोड़ी बहुत नही हो रही है। लेकिन जब बात वोट डालने की आती है तो वह सारी परेशानियों को ताक पर रखकर मोदी की स्थिति और मजबूत बना आती है । यानि कि जनता अब रोटी कपड़ा और मकान से थोड़ा आगे निकल गई है। ये सब उसे चाहिए तो, लेकिन उसे अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर भी अपने प्रधान मंत्री का वही जलजला चाहिए, जैसा कि देशी मामलों में दिखाई देता है। सार संक्षेप ये कि मोदी लहर का ज्वार लगातार उठान की ओर अग्रसर है। उसे रोक पाना फिलहाल तो दूर की कौड़ी नजर आता है।

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