पवन बाली | भाजपा का मिशन 2018 शुरू हो चुका है, मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार अनेक मुद्दों पर रक्षात्मक मुद्रा में है। समस्याएं और विपक्षी आक्रामकता मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के सामने मुंह बाए खड़ी हुई हैं। वहीं आर्थिक तंगी ने प्रदेश सरकार को भारी परेशानी में ला खड़ा किया है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी मिशन 2018 को किस तरह फतह कर पाएगी। क्यों कि उसके पास सहायता की केंद्र बिंदु केवल प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी हैं, और उस ओर से फिलहाल किसी भी प्रकार की इमदाद नदारद है। अत: वर्तमान परिदृष्य ने एक बात तो साफ कर दी है कि शिवराज सिंह और नरेंद्र मोदी के बीच ऐसा कुछ तो है जो ठीक नही है। राजनीति के जानकारों की मानें तो शिवराज का लगातार 12 सालों तक मुख्य मंत्री बने रहना भी उनके लिए उन्ही की राह में रोड़ा साबित हो रहा है। क्यों कि यदि शिवराज चौथी बार मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री बनने में कामयाब होते हैं तो वे यकीनन देश के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के लिए उन्ही की पार्टी में सबसे बड़ी चुनौती बन कर उभरने वाले हैं। अत: आशंका यह जताई जा रही है कि अपनी भावी परेशानी को मिटाने की गरज से हो सकता है कि श्री मोदी हर वो प्रयास करेंगे, जिनके चलते शिवराज सिंह चौथी बार मुख्य मंत्री नही बन पाएं। शायद यही वो वजह है जिसके चलते प्रदेश सरकार जब जब केंद्र से आर्थिक सहायता की मांग करती है, तब तब केंद्र से एक ही जवाब मिलता है। वह ये कि मध्य प्रदेश सरकार को अपने आर्थिक संसाधनों को मजबूत करने चाहिए और उसे अपने स्तर पर ही धन की व्यवस्थाएं करनी चाहिए। केंद्र सरकार के इस बयान को राजनैतिक पंडित इस रूप में भी ले रहे हैं कि यदि प्रदेश सरकार अपना खजाना भरना चाहती है तो उसे इस कार्य के लिए जनता पर नए कर अधिरोपित करने होंगे। और यदि ऐसा होता है तो मध्य प्रदेश का आम आदमी भाजपा से ज्यादा शिवराज सिंह के खिलाफ अवधारणा स्थापित कर सकता है। यही तो श्री मोदी चाहेंगे कि श्री चौहान आम आदमी की आंख की किरकिरी बनें और उनका चौथी बार मुख्य मंत्री बनने का रास्ता बाधित हो। ये जो आशंकाएं सामने आ रही हैं वे अकारण भी नही हैं। हमें पिछले आम चुनाावों की भाजपायी परिस्थितियों पर नजर डलनी होगी। याद करें, जब भाजपा का एक धड़ा भावी प्रधान मंत्री के लिए नरेंद्र मोदी का नाम प्रस्तावित कर रहाथा, तब पार्टी के वरिष्ठतम नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने इसी पद के लिए मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री शिवराज सिंह का नाम जोर शोर से उठाया था। बात यहां तक बिगड़ी कि तब शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश के आसन्न विधान सभा चुनावों के मद्देनजर भाजपा नेतृत्व से यह मांग की थी कि पार्टी की ओर से भावी प्रधान मंत्री पद के लिए प्रत्याशी के नाम की घोषणा अभी नही की जाए। यह काम प्रदेश के विधान सभा चुनावों के बाद किया जाना पार्टी हित में रहेगा। श्री चौहान के उक्त बयान को तत्समय काफी गंभीरता से इसलिए लिया गया, क्यों कि पहली बात तो यह नाम श्री आडवाणी के मुख से निकला था। जिनकी उस वक्त भाजपा में राष्ट्रीय स्तर पर तूती बोला करती थी। दूसरी बात ये कि शिवराज और आडवाणी यह आस लगाए बैठे थे कि यदि भाजपा एक बार फिर मध्य प्रदेश में सरकार बनाती है तो इसका श्रेय सिर्फ और सिर्फ शिवराज सिंह चौहान को ही जाने वाला है। और यह दिख भी रहा था कि प्रदेश में इस बार भी सरकार भाजपा की ही बनने वाली है। अत: सम्भावनाएं यह तलाशी जा रही थीं कि तीसरी बार मुख्य मंत्री बनने पर शिवराज को भी नरेंद्र मोदी के समान लोकप्रिय बताकर भाजपा के केंद्र में प्रतिस्पर्धा पैदा किया जाए और शीर्ष नतृत्व पर यह दवाब बनाया जाए कि प्रधान मंत्री पद के लिए मोदी के साथ साथ चौहान के नाम पर भी विचार किया जाए। लेकिन तब तक बाजी नरेंद्र मोदी के हाथ आचुकी थी सो भाजपा उनके नेतृत्व तले चुनाव लड़ी और अपार समर्थन बटोरते हुए दिल्ली में भगवा सरकार पूर्ण बहुमत के साथ पहली बार स्थापित हो गई। जैसा कि सभी जानते हैं, मोदी अपने भीतरी और बाहरी प्रतिस्पर्धियों को लेकर काफी सतर्क और सक्रिय रहते हैं। उस पर तुर्रा यह कि वर्तमान में ब-जरिए अमित शाह, भाजपा पर नरेंद्र मोदी का एक छत्र शासन स्थापित है। अत: वे अपनी आदत के मुताबिक ऐसा कोई मौका हाथ से नही जाने देंगे, जिससे शिवराज सिंह चौहान की परेशानियां बढ़तीं हो। देखने में ऐसा आ भी रहा है कि शिवराज जहां आर्थिक मदद के लिए बार बार केंद्र सरकार से गुहार लगा रहे हैं, उतनी ही बार उनकी बात को अनदेखा किया जा रहा है। जबकि शिवराज सिंह ने श्री मोदी को मनाने के अनेक प्रयास किए , ऐसा अनेक आयोजनों को दखकर कहा जा सकता है। उदाहरण के लिए उन्होंने प्रदेश की कई महत्वपूर्ण योजनाओं के शिलान्यास और लोकार्पण प्रधान मंत्री के हाथों से कराए ताकि उनकी नाराजगी को जड़ से मिटाई जा सके लेकिन ऐसा लगता है कि नरेंद्र मोदी अपने इरादों पर अडिग रहकर शिवराज सिंह की राह में रोड़ा पैदा करने का मन बना चुकें हैं।

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