नोटबंदी के ‘ब्लैक-होल’ में ‘रेडिएशन’ से पस्त ‘इकॉनमी’

ब्रह्मांड की सबसे रहस्यमयी चीज ‘ब्लैक-होल’ के समान ही देश की इकॉनमी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नोटबंदी के ‘ब्लैक-होल’ में फंस चुकी है। जिस प्रकार साइंस और फिजिक्स में ‘ब्लैक-होल’ थ्योरी के बारे में कुछ सवालों के उत्तर अभी तक नहीं मिल पाए हैं, उसी प्रकार इकॉनमी की आकाश-गंगा में नोट-बंदी की थ्योरी से जुड़े विवादास्पद सवालों के निश्चित उत्तर सामने नहीं आ पा रहे हैं। नोटबंदी के ‘ब्लैक-होल’ में फंसी इकॉनमी के परिणामों को लेकर अर्थ-विशेषज्ञों में घमासान जारी है। नोटबंदी के बाद देश के बिगड़े आर्थिक हालात चिंता का विषय बने हुए हैं।
भाजपा के पूर्व वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा के इन आरोपों के बाद राजनीति तेज हो गई है कि भारत की अर्थ-व्यवस्था में गिरावट के लिए मोदी-सरकार का आर्थिक-प्रबंधन जिम्मेदार है। यशवंत सिन्हा के आरोप इसलिए गंभीरता पैदा करते हैं कि कांग्रेस के वित्त-मंत्रियों के अलावा वो एक मात्र ऐसे विपक्षी नेता हैं, जिन्होंने केन्द्रीय वित्त-मंत्री के नाते सात मर्तबा केन्द्र सरकार का बजट पेश किया है। यशवंत सिन्हा के प्रहार से मोदी-सरकार तिलमिला उठी है। भाजपा के पूर्व वित्तमंत्री सिन्हा के तर्कों को काटने के लिए भाजपा ने उनके ही बेटे मोदी-सरकार में नागरिक उड्डयन राज्यमंत्री जयंत सिन्हा को उतारा है। बाप-बेटे के आर्थिक-शास्त्रार्थ ने विवाद को नए आयाम दे दिए हैं। जयंत सिन्हा की दलीलें जमीनी हकीकत से टकरा कर टूट कर बिखर रही हैं। जयंत सिन्हा नोटबंदी को गेम-चेंजर कहते हैं, जबकि यशवंत सिन्हा मानते हैं कि इकॉनमी डूब रही है।
‘ब्लैक-होल’ से मोदी की नोटबंदी की तुलना कई मायनों में समीचीन है। फिजिक्स के मुताबिक ‘ब्लैक-होल’ के नजदीक गुरुत्वाकर्षण बल सबसे ज्यादा होने के कारण उसके आसापास के हिस्सो में समय की गति धीमी हो जाती है। नोटबंदी के ‘नेगेटिव-फोर्स’ के कारण भारतीय इकॉनमी भी मंदी के अभूतपूर्व दौर में फंस चुकी है। भौतिक-विज्ञान में ‘ब्लैक-होल’ की सीमा को ‘इवेंट-हराइजन’ कहते है। सामान्य भाषा में ‘इवेंट-हराइजन’ एक किस्म की लक्ष्मण-ऱेखा है, जिसको पार करने के पहले यथास्थिति में सुरक्षित वापस लौटने की गुंजाइश होती है, लेकिन नोटबंदी ‘इवेंट-हराइजन’ याने लक्ष्मण-रेखा को लांघ चुकी है। अब नोटबंदी के ‘ब्लैक-होल’ से भारत की इकॉनमी की वापसी संभव नहीं है। फिजिक्स की भाषा में ‘ब्लैक-होल’ में फंसी कोई चीज बाहर नहीं निकल सकती है। ‘ब्लैक-होल’ से सिर्फ ‘रेडिएशन’ ही निकलता है। ठीक उसी प्रकार नोटबंदी के ‘ब्लैक-होल’ से निकलने वाला ‘रेडिएशन’ इकॉनमी पर असर दिखाने लगा है। साइंस में जिस प्रकार ‘ब्लैक-होल’ के नजदीक चीजें डरावनी हो जाती हैं, उसी प्रकार नोटबंदी के ‘ब्लैक-होल’ के पास भारत की इकॉनमी लोगों को भयभीत कर रही है।
चीन और जापान के बाद भारत की अर्थ-व्यवस्था एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थ-व्यवस्था है। भारत की कमजोर आर्थिक-सेहत दुनिया की चिंताओं का विषय है। 2016 में भारत की इकॉनमी करीब 7 प्रतिशत की दर से बढ़ रही थी। वर्तमान में यह 5.7 प्रतिशत की दर पर पहुंच चुकी है, जो पिछले चार वर्षों में सबसे निचले स्तर पर है। नोटबंदी के बाद जीएसटी के कारण भी इकॉनमी प्रतिकूलताओं से जूझ रही है। मोदी-सरकार ने जीएसटी लागू करते हुए एक राष्ट्र, एक टैक्स का नारा दिया था, लेकिन फिलवक्त कई स्तरों पर टैक्स लग रहा है। अर्थ व्यवस्था के हालात पर यशवंत सिन्हा के साथ ही सुब्रमण्यम स्वामी ने भी वित्त मंत्री अरुण जेटली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। इन आलोचनाओं में भाजपा की आंतरिक राजनीति भी हो सकती है, लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की चिंताएं सही अर्थों में लोगों को उव्देलित कर रही हैं, क्योंकि वित्तीय मामलों में मनमोहन सिंह को जनता का सबसे ज्यादा सम्मान और विश्वास हासिल है। इन मामलो में वो राजनीति नहीं करते हैं। नोटबंदी के तत्काल बाद मनमोहन सिंह ने नोटबंदी को आपराधिक-षडयंत्र निरुपित करते हुए जीडीपी में 2 प्रतिशत गिरावट का अंदेशा व्यक्त किया था। उनकी भविष्य़वाणी सही सिध्द हो रही है।
नोटबंदी के ‘ब्लैषक-होल’ में फंसी भारत की इकानॉमी पर ‘रेडियेशन’ का असर दिखने लगा है। सरकार कहती है कि इंतजार करो, अच्छे दिनों का सपना साकार होगा, जबकि नोटबंदी को खारिज करने वाले अर्थ-विशेषज्ञ कह रहे हैं कि नोटबंदी के ‘ब्लैक-होल’ से सही-सलामत निकलना लगभग असंभव है। नेताओं की नजर सिर्फ चुनाव पर होती है। प्रधानमंत्री मोदी यूं ही जनता को बहलाते रहेंगे और राहुल गांधी राजनीतिक-अठखेलियां करते रहेंगे। उन्हें सिर्फ चुनाव जीतना है। राजनीतिक बयानबाजी चलती रहेगी। देश नोटबंदी के चक्रव्यूह में फंस चुका है। अच्छे-बुरे परिणाम जनता को ही भुगतना हैं। फिजिक्स के मुताबिक ‘ब्लैक-होल’ के करीब जाने पर आपकी भयानक तरीके से मौत हो सकती है। हम ये दुआ और आशा कर सकते हैं कि नोटबंदी के ‘ब्लैोक-होल’ में भारत की इकॉनमी की नियति वैसी नहीं होगी…।

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